मनुष्य जीवन का उद्देश्य सच्ची भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करना है
सतभक्ति से मोक्ष
मानव जीवन में सतभक्ति नहीं की तो परमात्मा के विधान अनुसार चौरासी में महाकष्ट उठाना पड़ता है। सतभक्ति पूर्ण सन्त ही बताते हैं।
सच्चा सतगुरु वही है जिसके द्वारा बताई गई भक्ति विधि शास्त्र प्रमाणित हो।
सच्चे सतगुरु के सत्संगों से हमें पता चलता है कि एक ऐसा परमात्मा है जो भयंकर से भयंकर रोग को भी समाप्त कर देता है फिर चाहे वह कोरोना जैसी महामारी भी क्यों न हो।
जब तक सच्चे सतगुरु के सत्संग के विचार सुनने को नहीं मिलते तो भूलवश मानव अहंकार में जीता है। सच्चे सतगुरु के सत्संग से पता चलता है कि परमात्मा अहंकार से कोसों दूर है। और इस मनुष्य शरीर का सदुपयोग कैसे करना चाहिए ये भी सत्संग में ही पता चलता है।
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